स्वाइन फ्लू से बचने के बेहतरीन उपाय!

swine flu se bachne ke desi upay in hindi  स्‍वाइन फ्लू के लक्षण और इससे बचने के घरेलू उपचार

दोस्तों स्वाइन फ्लू का वायरस बहुत संक्रामक है। इंफ्लूएंजा ए स्‍वाइन फ्लू वायरस के एक प्रकार ‘एच-1-एन-1‘ द्वारा संक्रमित व्‍यक्ति द्वारा दूसरे व्‍यक्ति को फैलता है। स्वाइन फ्लू सूअरों में होने वाला सांस संबंधी एक अत्यंत संक्रामक रोग है जो कई स्वाइन इंफ्लुएंजा वायरसों में से एक से फैलता है. आमतौर पर यह बीमारी सूअरों में ही होती है लेकिन कई बार सूअर के सीधे संपर्क में आने पर यह मनुष्य में भी फैल जाती है.

हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं जिनकी मदद से आप फ्लू के वायरस से निपट सकते हैं, और स्वाइन फ्लू बीमारी से भी। आप इनमे से कुछ ऐसी औषधियाँ चुन सकते हैं जो आपको सरलता से मिल जाये और आपको सूट करें। यदि अभी आप स्वाइन फ्लू से पीड़ित हैं तो भी ये चमत्कारी तरीके आपके लिए मददगार साबित होंगे।

क्या हैं लक्षण :-

स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं सर्दी, जुकाम, सूखी खांसी होना, थकान होना, सिरदर्द और आंखों से पानी आना. इसके अलावा सांस भी फूलने लगती है. कमजोरी, जकड़न भूख कम लगने जैसी शिकायत हो सकती है। अगर संक्रमण गंभीर है तो बुखार तेज होता जाता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाने की जरूरत होती है.

स्वाइन फ्लू से बचाव :-

स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 नाम से जाना जाता है। यह मौसमी फ्लू है ।इसके वायरस सबसे ज्यादा शुकरो में पाए जाते हैं। इसके मरीज के खांसने या छीकने पर मुंह और नाक से निकले द्रव्यकण हवा में फैलने से या व्यक्ति के संपर्क में आने पर संक्रमण तेजी से फैलता है।

इन दिनों देश के कई इलाकों में स्वाइन फ्लू के मरीज बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसका इलाज एलोपैथिक पद्धति से ही करने की सलाह दी है लेकिन एक बार ठीक होने के बाद रिकवरी व अन्य समस्याओं में आयुर्वेद में होम्योपैथिक की मदद ली जा सकती है। फ्लू से ठीक होने के बाद शरीर में कमजोरी, आलस्य, भूख कम लगना और जकड़न जैसे लक्षण दिख सकते हैं। स्वाइन फ्लू से बचाव की कोशिश करें। यदि लक्षण दिखे तो तुरंत इलाज करवाएं। डॉक्टर की सलाह लें इसका टीका भी लगवा सकते हैं।

काढ़े से मिलेगा लाभ :-

बचाव के तौर पर गिलोय, तुलसी, लहसुन, हल्दी, सोंठ लोंग, कालीमिर्च, पिप्पली को बराबर मात्रा में दो कप पानी में उबालें। जब पानी आधा कप रह जाए तो इस आयुर्वेदिक काढ़े को पी सकते हैं। स्वाइन फ्लू है तो वासा, कंटकारी, पुष्करमूल, गाजवा, गिलोय, तुलसी, हल्दी, सोंठ, लौंग, काली मिर्च पीप्पली को बराबर मात्रा में मिलाकर दो कप पानी में डालकर उबालें। जब पानी आधा कप रह जाए तो काढा पीएं ।

प्रमुख लक्षण :-

नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाग जाम होना, मांसपेशियां में दर्द या जकड़न महसूस होना। सिर में तेज दर्द, सर्दी-जुकाम, लगातार खांसी चलना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, बुखार गले में खराश और इसका लगातार बढ़ते जाना स्वाइन फ्लू मुख्य लक्षण है।

स्वाइन फ्लू में सावधानी :-

5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं जिन्हें फेफड़े किडनी या दिल की बीमारी है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) पार्किंसन, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, डायबिटीज अस्थमा के मरीजों को स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

— इस बीमारी से बचने के लिए हाइजीन का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए. खांसते समय और झींकते समय टीशू से कवर रखें. इसके बाद टीशू को नष्ट कर दें.

— बाहर से आकर हाथों को साबुन से अच्छे से धोएं और एल्कोहल बेस्ड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें.

— जिन लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण हों तो उन्हें मास्क पहनना चाहिए और घर में ही रहना चाहिए.

— स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीज से क्लोज कॉंटेक्ट से बचें. हाथ मिलाने से बचें. रेग्यूलर ब्रेक पर हाथ धोते रहें.

— जिन लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही हो और तीन-चार दिन से हाई फीवर हो, उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

— स्वाइन फ्लू के टेस्ट के लिए गले और नाक के द्रव्यों का टेस्ट होता है जिससे एच1एन1 वायरस की पहचान की जाती है. ऐसा कोई भी टेस्ट डॉक्टर की सलाह के बाद ही करवाएं.

स्वाइन फ्लू में लाभदायक व बचाव :-

बचाव के तौर पर पांच तुलसी के पत्ते, पांच ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही मात्रा में हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिए। गिलोय बेल के तने को पानी में उबालकर एवं छानकर पीएं। आधा चम्मच हल्दी दूध में डालकर पीएं। आधा चम्मच हल्दी गरम पानी या शहद में मिलाकर भी ली जा सकती है।

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